150+ खेती पर शायरी | Kheti Par Shayari

भारत की मिट्टी में सिर्फ़ फसल ही नहीं उगती, बल्कि पसीने, मेहनत और उम्मीदों की खुशबू भी बसती है। किसान जब हल उठाता है, तो वो सिर्फ़ ज़मीन नहीं जोतता, बल्कि आने वाले कल के सपने बोता है। खेती पर शायरी उसी संघर्ष, उसी सादगी और उसी आत्मसम्मान की आवाज़ है।

इन शायरियों में खेतों की हरियाली है, किसानों की थकी मुस्कान है और मिट्टी से जुड़ा वो रिश्ता है, जिसे शब्दों में पिरोना आसान नहीं, फिर भी दिल से निकलता है। अगर आप खेती के दर्द, गर्व और खूबसूरती को महसूस करना चाहते हैं, तो खेती पर शायरी आपके दिल तक ज़रूर पहुँचेगी।

खेती पर शायरी

मिट्टी से रिश्ता कुछ ऐसा निभाया किसान ने,
खुद भूखा रहकर भी दुनिया को खिलाया किसान ने।

धूप, बारिश, तूफ़ान से जो कभी ना घबराया,
वो किसान है जिसने हर हाल में फसल उगाया।

मिट्टी की खुशबू में जो सुकून मिलता है,
वो शहरों के महलों में कहाँ मिलता है।

बारिश की एक बूँद से मुस्कुराता है किसान,
क्योंकि उसी में छुपा होता है उसका जहान।

जिस मिट्टी को लोग पैरों तले रौंदते हैं,
उसी मिट्टी को माथे से लगाते हैं किसान।

कभी सूखा, कभी बाढ़ सह जाता है,
फिर भी किसान मुस्कुराना नहीं भूलता है।

फसल कटती है तो खुशी छा जाती है,
साल भर की मेहनत रंग ले आती है।

खेती में है सब्र का इम्तिहान,
हर कोई नहीं बन सकता किसान।

किसान का पसीना जब धरती पीती है,
तब जाकर हरियाली जीती है।

जब तक खेत हरे हैं, देश खड़ा है,
किसान के दम पर ही भारत बड़ा है।

किसान पर शायरी दो लाइन

धूप में जलकर जो हरियाली उगाता है,
वही किसान देश को आगे बढ़ाता है।

हल की लकीरों में लिखा है उसका नसीब,
मेहनत से बदल देता है वो हर तक़दीर।

मिट्टी से जुड़ा है किसान का हर ख्वाब,
इसी मिट्टी में बसता है उसका हर जवाब।

किसान का जीवन आसान नहीं होता,
पर उसका हौसला कभी परेशान नहीं होता।

मिट्टी से रिश्ता जो दिल से निभाता है,
वही किसान कहलाता है।

धरती माँ का सच्चा सपूत है किसान,
तभी तो कहलाता है देश की शान।

जब खेतों में हरियाली छा जाती है,
किसान के चेहरे पर खुशी आ जाती है।

बीज बोना आसान नहीं होता,
हर कोई किसान नहीं होता।

जिस देश में किसान खुशहाल है,
वही देश सच में मालामाल है।

कांटों से भरे रास्तों पर चलता है किसान,
फिर भी चेहरे पर रखता है मुस्कान।

Kisan Shayari 2 line Attitude

हम मिट्टी से उठे हैं, घमंड नहीं रखते,
पर मेहनत पर सवाल उठे तो छोड़ते नहीं।

किसान का हाथ मिट्टी में सही,
पर हौसले आसमान छूते हैं भाई।

हम हल चलाते हैं किस्मत नहीं,
पर किस्मत भी हमारे आगे झुकती है।

ना शहर की शान, ना पैसों का घमंड,
किसान का रुतबा उसकी मेहनत से बुलंद।

मिट्टी से प्यार है, डर से नहीं,
किसान हूँ मैं, किसी से कम नहीं।

बीज बोते हैं भरोसे के साथ,
फसल काटते हैं शान के साथ।

ना ताज चाहिए, ना तख़्त चाहिए,
किसान को बस मेहनत का हक़ चाहिए।

धूप से दोस्ती, बारिश से यारी है,
किसान की यही असली तैयारी है।

हमारे सब्र को कमजोरी मत समझ,
किसान जब खड़ा होता है तो तूफ़ान थम जाते हैं।

हम अन्न उगाते हैं, अहंकार नहीं,
पर सम्मान पर आए तो समझौता नहीं।

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