450+ किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी | Kisi Ko Jalane Ki Attitude Shayari Hindi

किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी उन लोगों के लिए है जो अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और अलग पहचान से दुनिया को जवाब देना जानते हैं। यह शायरी सिर्फ शब्द नहीं होती, बल्कि एक सोच होती है जो बताती है कि इंसान अगर खुद पर भरोसा रखे और अपने लक्ष्य पर डटा रहे, तो उसकी कामयाबी अपने आप दूसरों को जलाने के लिए काफी होती है। एटीट्यूड शायरी में वही दम होता है जो चुप रहकर भी बहुत कुछ कह जाती है।

इस वेबसाइट पर आपको किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी का ऐसा कलेक्शन मिलेगा जो आपके स्टाइल और सोच दोनों को दर्शाएगा। चाहे सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाना हो या खुद को मोटिवेट करना हो, ये शायरी आपके आत्मविश्वास को और मजबूत बनाएगी। यहाँ दी गई शायरी उन लोगों के लिए है जो भीड़ से अलग चलना पसंद करते हैं और अपनी पहचान अपने अंदाज़ से बनाते हैं।

किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी

हमसे जलने वालों की भीड़ है जनाब,
क्योंकि हम वहाँ खड़े हैं जहाँ पहुँचना उनका ख़्वाब है।

अंदाज़ हमारा थोड़ा अलग है,
इसलिए लोग कहते हैं हमें एटीट्यूड का शौक है।

हम वो नहीं जो डर के जीएं,
हम वो हैं जिनसे लोग जल-जल के जिएं।

नाम नहीं काम बोलता है,
और यही बात कई लोगों को चुभती है।

जलने वाले भी कमाल करते हैं,
महफ़िल हमारी और चर्चे अपने करते हैं।

हमारी बराबरी करना आसान नहीं,
क्योंकि हम जैसे बनने में उम्र लग जाती है।

शोर नहीं करते अपनी जीत का,
क्योंकि हमारी जीत ही काफी है लोगों को जलाने के लिए।

हमसे जलने वालों का इलाज नहीं,
क्योंकि जलन बीमारी नहीं आदत है।

जो पीठ पीछे बोलते हैं,
सामने आने की औकात नहीं रखते।

वक्त आने पर जवाब भी देंगे,
अभी तो बस लोगों को जलने दे रहे हैं।

दुश्मन को जलाने वाली शायरी हिंदी में 2 Line

हम वो खेल नहीं खेलते,
जिसमें जीतने के लिए झुकना पड़े।

जलन रखने वालों से बस इतना कहना है,
अपनी मेहनत बढ़ाओ, शिकायतें नहीं।

हम ऊपर उठते जा रहे हैं,
और लोग नीचे से जलते जा रहे हैं।

हम सादगी में भी नवाब हैं,
और यही बात कई लोगों को पसंद नहीं।

हम अपनी धुन में रहते हैं,
और यही हमारी सबसे बड़ी अदा है।

हमसे टकराने की सोच मत रखना दुश्मन,
हम वहाँ खड़े होते हैं जहाँ रास्ते खत्म हो जाते हैं।

दुश्मनी निभानी है तो औकात में रहना,
क्योंकि हमारा नाम ही काफी है जलाने के लिए।

हम अपनी जीत का ढोल नहीं पीटते,
दुश्मन खुद ही जल-जल कर शोर मचाते हैं।

दुश्मन हमारे खिलाफ बोलते बहुत हैं,
पर सामने आने का हौसला नहीं रखते।

हमसे दुश्मनी सोच-समझकर करना,
अंजाम अक्सर लोग भूल जाते हैं।

किसी को जलाने वाली शायरी

तुम्हारी सोच छोटी रह गई,
और हमारी उड़ान ऊँची हो गई।

हम खामोश क्या हुए,
तुम्हें लगा जीत गए हो,
ज़रा सब्र रखो जनाब,
खेल अभी बाकी है।

तुम्हारी औकात का अंदाज़ा
हमें पहले ही था,
बस तुम्हें खुद पर
घमंड ज़रा ज़्यादा था।

हमसे जलने वाले भी कमाल करते हैं,
नाम हमारा लेते हैं
और बदनाम हमें ही करते हैं।

तुम्हारी बातों में दम नहीं,
बस आवाज़ ऊँची है,
वरना सच तो ये है
कि तस्वीर अब भी अधूरी है।

हम वो नहीं जो हर किसी को जवाब दें,
हम वो हैं
जिनका जवाब वक़्त देता है।

हमसे जलने वालों की
अब पहचान क्या दें,
जो खुद बुझ चुके हों
वो क्या रोशनी देखें।

तुम्हें लगा हम हार गए,
ये तुम्हारी सबसे बड़ी भूल थी,
हम तो चुप थे जनाब,
कहानी अभी शुरू ही हुई थी।

औकात की बात मत कर पगले,
जिस दिन हमने नाप ली,
उस दिन तेरी हैसियत
खुद-ब-खुद कम पड़ जाएगी।

तुम्हारी नज़रें आज भी
हमें ही ढूंढती हैं,
और कहते हो
कि हमें फर्क नहीं पड़ता।

हम वो आईना हैं
जो सच दिखा दें,
इसलिए लोग
हमसे नज़रें चुराते हैं।

रिश्तेदार को जलाने वाली शायरी

रिश्तेदार वो होते हैं,
जो सामने मीठे और पीछे सबसे ज़्यादा कड़वे हों।

खून के रिश्ते हैं जनाब,
इसलिए ज़हर भी घर का ही मिलता है।

हमारी तरक्की से जलने वाले,
अक्सर अपने ही रिश्तेदार होते हैं।

मुँह पर दुआएँ देते हैं,
पीठ पीछे बद्दुआओं की लाइन लगाते हैं।

रिश्तों का लिहाज़ हमने रखा,
वरना औकात दिखाने में देर नहीं लगती।

हम बदले नहीं हैं,
बस रिश्तेदारों को पहचान गए हैं।

तुम्हारी चिंता झूठी थी,
बस हमारी खुशी चुभ गई।

घर के लोग ही पूछते हैं,
“इतना आगे कैसे निकल गए?”

रिश्तेदारों की जलन का अंदाज़ा तब होता है,
जब वो आपकी मेहनत को किस्मत कहते हैं।

हमारी कामयाबी पर ताली कम,
और बातें ज़्यादा हुईं।

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